सीखना केवल जानकारी याद कर लेना नहीं है; यह अनुभव, अभ्यास, अवलोकन और विचार के माध्यम से ज्ञान तथा व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी बदलाव है। NCERT की शिक्षा-संबंधी सामग्री सीखने को सक्रिय भागीदारी, पूर्वज्ञान से संबंध और अनुभवों के आधार पर समझ विकसित करने से जोड़ती है।[1] **Learning Principles CTET Notes 2026** में अधिगम की प्रक्रिया को समझने के लिए प्रमुख मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों और कक्षा-स्थितियों को साथ पढ़ा गया है।
विषय-सूची
1. अधिगम का अर्थ और प्रक्रिया
अधिगम की पहचान
अधिगम (Learning) अनुभव या अभ्यास के कारण ज्ञान, कौशल, समझ अथवा व्यवहार में आने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है। हर बदलाव अधिगम नहीं होता: थकान, बीमारी, दवा या क्षणिक मनोदशा से हुआ अस्थायी बदलाव अपने-आप में अधिगम का प्रमाण नहीं है।
उदाहरण: विद्यार्थी भिन्नों को केवल नियम याद करके नहीं, बल्कि कागज़ की पट्टियों को बराबर हिस्सों में बाँटकर समझता है। बाद में वह इसी समझ का उपयोग अलग सवाल में कर पाता है। यह सीखने का अधिक मजबूत संकेत है।
अधिगम के लिए एक ही सार्वभौमिक, चार-चरणीय क्रम नहीं माना जाता। अलग सिद्धांत अलग पहलुओं पर ध्यान देते हैं। किसी सामान्य कक्षा-स्थिति को समझने के लिए यह उपयोगी क्रम अपनाया जा सकता है:
- पूर्वज्ञान और परिस्थिति: विद्यार्थी पहले से क्या जानता है और उसके सामने कौन-सी समस्या या अनुभव है?
- ध्यान और सक्रिय भागीदारी: वह देखता, सुनता, प्रश्न करता, प्रयास करता या किसी मॉडल का अवलोकन करता है।
- प्रतिक्रिया और परिणाम: विद्यार्थी उत्तर देता या कार्य करता है; प्रतिक्रिया, अभ्यास और परिणाम आगे के प्रयास को प्रभावित करते हैं।
- अर्थ-निर्माण और स्थानांतरण: वह नए विचार को पुराने ज्ञान से जोड़ता है और सीखी हुई बात को नई परिस्थिति में लागू करता है।
- पुनरावृत्ति और प्रतिक्रिया: अभ्यास, उपयोगी feedback और समय के साथ दोहराव सीखने को मजबूत कर सकते हैं।
एक आम भ्रम
कक्षा में विद्यार्थी का चुप बैठना यह सिद्ध नहीं करता कि उसने सीख लिया है। समझ जाँचने के लिए उससे कारण बताने, उदाहरण देने या नए प्रश्न पर विचार लागू करने को कहना अधिक उपयोगी है।
2. Thorndike के अधिगम-नियम
Edward L. Thorndike का प्रयास-और-त्रुटि (Trial and Error) दृष्टिकोण बताता है कि समस्या हल करते समय व्यक्ति कई प्रतिक्रियाएँ आज़मा सकता है। सफल प्रतिक्रिया और उसके परिणाम के बीच संबंध मजबूत हो सकता है। उनके तीन पारंपरिक नियम तत्परता, अभ्यास और प्रभाव के नियम हैं।
प्रभाव का नियम (Law of Effect)
जिस प्रतिक्रिया के बाद संतोषजनक परिणाम मिलता है, उसके दोहराए जाने की संभावना बढ़ सकती है; असंतोषजनक परिणाम प्रतिक्रिया को कमजोर कर सकता है। यह नियम व्यवहार और उसके परिणाम के संबंध पर बल देता है।
उदाहरण: विद्यार्थी को समाधान की सही विधि समझाने के बाद विशिष्ट प्रशंसा मिलती है, इसलिए वह उसी उपयोगी रणनीति को फिर अपनाता है। केवल अंक देना पर्याप्त नहीं; feedback में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उत्तर सही क्यों है।
अभ्यास का नियम (Law of Exercise)
उचित अभ्यास से सीखी गई प्रतिक्रिया या संबंध मजबूत हो सकता है। केवल यांत्रिक दोहराव हमेशा पर्याप्त नहीं होता; अभ्यास के साथ समझ, सुधार और feedback भी आवश्यक हैं।
उदाहरण: दशमलव के प्रश्नों का अभ्यास करने के बाद विद्यार्थी अपनी गलती पहचानता है और अगली बार स्थान-मूल्य का सही उपयोग करता है।
तत्परता का नियम (Law of Readiness)
सीखने के लिए मानसिक तैयारी, आवश्यक पूर्वज्ञान और कार्य करने का अवसर महत्त्व रखते हैं। विद्यार्थी के तैयार न होने पर केवल दबाव बढ़ाना सीखने को बेहतर नहीं बनाता।
उदाहरण: अनुपात पढ़ाने से पहले शिक्षक यह जाँचता है कि विद्यार्थी गुणा और भाग की मूल बातें समझते हैं या नहीं।
इन नियमों को किसी कठोर सूत्र की तरह न लें। Thorndike के नियमों की पारंपरिक व्याख्या परीक्षा के लिए उपयोगी है, जबकि आधुनिक शिक्षण में विद्यार्थी की समझ, संदर्भ और व्यक्तिगत भिन्नताओं पर भी ध्यान दिया जाता है।
3. Pavlov और Skinner: अनुबंधन के दो रूप
3.1 Pavlov का Classical Conditioning
Classical Conditioning में पहले किसी प्राकृतिक प्रतिक्रिया को उत्पन्न करने वाले उद्दीपन के साथ एक तटस्थ उद्दीपन को बार-बार जोड़ा जाता है। बाद में तटस्थ उद्दीपन स्वयं सीखी हुई प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकता है। Ivan Pavlov के प्रसिद्ध कुत्ते वाले प्रयोग में भोजन स्वाभाविक रूप से लार उत्पन्न करता था; भोजन के साथ घंटी को जोड़ने के बाद घंटी अकेले भी लार उत्पन्न करने लगी।
- Unconditioned Stimulus (UCS): भोजन, जो बिना प्रशिक्षण के लार उत्पन्न करता है।
- Unconditioned Response (UCR): भोजन के प्रति स्वाभाविक लार-प्रतिक्रिया।
- Conditioned Stimulus (CS): घंटी, जो जोड़ने की प्रक्रिया के बाद संकेत बनती है।
- Conditioned Response (CR): घंटी सुनकर उत्पन्न सीखी हुई लार-प्रतिक्रिया।
इससे जुड़े शब्दों में generalization समान उद्दीपनों पर मिलती-जुलती प्रतिक्रिया, discrimination अलग उद्दीपनों में भेद करना और extinction पर्याप्त समय तक अपेक्षित संयोजन न मिलने पर conditioned response का कमजोर होना है। Extinction का अर्थ यह आवश्यक नहीं कि सीखी हुई संगति हमेशा के लिए मिट गई।
कक्षा से संबंध
यदि किसी विद्यार्थी को बार-बार सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाए, तो वह किसी विषय या कक्षा-संकेत के साथ चिंता जोड़ सकता है। सुरक्षित वातावरण और सहायक अनुभव ऐसी नकारात्मक संगति को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह उदाहरण classical conditioning से समझा जा सकता है, लेकिन हर विद्यार्थी की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं होगी।
3.2 Skinner का Operant Conditioning
B. F. Skinner का Operant Conditioning व्यवहार के बाद आने वाले परिणामों पर केंद्रित है। विद्यार्थी कोई क्रिया करता है और उसके परिणाम भविष्य में उस क्रिया की संभावना को प्रभावित कर सकते हैं।
- Positive reinforcement: व्यवहार के बाद कोई वांछित चीज़ देना, जिससे व्यवहार बढ़े; जैसे अच्छे प्रयास पर विशिष्ट प्रशंसा।
- Negative reinforcement: व्यवहार के बाद कोई अप्रिय परिस्थिति हटाना, जिससे व्यवहार बढ़े। यह दंड नहीं है।
- Punishment: ऐसा परिणाम जो व्यवहार की संभावना घटाए। Positive punishment में कोई अप्रिय परिणाम जोड़ा जाता है; negative punishment में कोई वांछित चीज़ हटाई जाती है।
- Extinction: पहले व्यवहार को बनाए रखने वाला reinforcement बंद होने पर वह व्यवहार समय के साथ घट सकता है।
परीक्षा में महत्त्वपूर्ण अंतर
Negative reinforcement ≠ punishment. Negative reinforcement व्यवहार को बढ़ाता है क्योंकि अप्रिय चीज़ हटती है; punishment का उद्देश्य व्यवहार को घटाना होता है। नाम में “negative” का अर्थ बुरा नहीं, बल्कि किसी चीज़ को हटाना है।
शिक्षण में reinforcement का उपयोग सोच-समझकर होना चाहिए। केवल बाहरी पुरस्कार पर निर्भरता के बजाय प्रगति, प्रयास, रणनीति और स्व-नियमन पर feedback देना भी आवश्यक है।
4. Bandura और Gestalt: देखकर सीखना और अंतर्दृष्टि
4.1 Bandura का Social Learning / Social Cognitive दृष्टिकोण
Albert Bandura ने दिखाया कि लोग केवल अपने प्रत्यक्ष परिणामों से ही नहीं, दूसरों के व्यवहार और उस व्यवहार के परिणामों को देखकर भी सीख सकते हैं। इसे observational learning या modeling कहते हैं। Bobo doll अध्ययन उनके शोध से जुड़ा प्रसिद्ध उदाहरण है; इसे इस सरल दावे तक सीमित नहीं करना चाहिए कि बच्चे हर देखे हुए व्यवहार की नकल अवश्य करते हैं।
अवलोकनात्मक अधिगम में चार प्रक्रियाएँ उपयोगी रूप से समझाई जाती हैं:
- Attention: विद्यार्थी मॉडल के व्यवहार पर ध्यान देता है।
- Retention: देखे गए व्यवहार को याद रखता है।
- Reproduction: व्यवहार को करने की क्षमता और अवसर के अनुसार दोहराता है।
- Motivation: व्यवहार करने की इच्छा, अपेक्षित परिणाम और परिस्थिति उसके प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं।
उदाहरण: शिक्षक किसी कठिन विज्ञान-प्रयोग में सुरक्षा के चरण दिखाता है। विद्यार्थी पहले प्रक्रिया देखता है, क्रम याद रखता है, फिर निगरानी में प्रयोग करता है। मॉडल का व्यवहार तभी उपयोगी सीख बनता है जब विद्यार्थी ध्यान दे, उसे समझे और अभ्यास का अवसर पाए।
4.2 Gestalt और Kohler का Insight Learning
Gestalt दृष्टिकोण में किसी समस्या के अलग-अलग हिस्सों के बजाय उनके आपसी संबंध और पूरे स्वरूप को समझने पर बल है। Wolfgang Köhler के चिंपैंज़ी संबंधी अध्ययनों को insight learning के उदाहरण के रूप में पढ़ाया जाता है: समस्या की स्थिति और वस्तुओं के संबंध को समझ लेने पर समाधान अचानक स्पष्ट हो सकता है।
उदाहरण: विद्यार्थी त्रिभुज के क्षेत्रफल का सूत्र केवल याद करने के बजाय यह देखता है कि दो समान त्रिभुज मिलकर एक आयत या समांतर चतुर्भुज जैसा क्षेत्र बना सकते हैं। संबंध समझने से सूत्र का अर्थ स्पष्ट होता है।
Insight का अर्थ यह नहीं कि अभ्यास या प्रयास की कोई भूमिका नहीं होती। समस्या को समझना, पहले के अनुभव और उपलब्ध संकेत भी समाधान में योगदान देते हैं। “समग्र पहले, भाग बाद में” एक उपयोगी शिक्षण रणनीति हो सकती है, हर विषय और हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य नियम नहीं।
5. सिद्धांतों की तुलना: किस पर ध्यान दिया जाता है?
| सिद्धांत / मनोवैज्ञानिक | मुख्य ध्यान | उदाहरण |
|---|---|---|
| Thorndike | प्रयास, परिणाम और सीखने के नियम | कई प्रयासों से puzzle हल करना |
| Pavlov | दो उद्दीपनों के बीच सीखी गई संगति | भोजन के साथ जोड़ी गई घंटी |
| Skinner | व्यवहार के बाद आने वाले परिणाम | प्रयास पर feedback मिलने से प्रयास बढ़ना |
| Bandura | अवलोकन, मॉडलिंग और प्रेरणा | प्रयोग का प्रदर्शन देखकर सीखना |
| Gestalt / Köhler | समग्र संबंध और अंतर्दृष्टि | समस्या के हिस्सों का संबंध पहचानना |
Classical conditioning में उद्दीपन-संबंध प्रमुख है; operant conditioning में व्यवहार के परिणाम। Thorndike के प्रयास-और-त्रुटि दृष्टिकोण में परीक्षण तथा परिणाम से चयन पर बल है, जबकि insight में समस्या के संबंधों की समझ प्रमुख है। Bandura का दृष्टिकोण यह जोड़ता है कि दूसरे लोगों को देखकर भी सीखना संभव है। ये दृष्टिकोण एक-दूसरे से पूरी तरह अलग-अलग दुनिया नहीं हैं; वास्तविक कक्षा में कई प्रक्रियाएँ साथ काम कर सकती हैं।
6. कक्षा में अधिगम-सिद्धांतों का उपयोग
स्थिति 1: विद्यार्थी बार-बार गलती करता है
शिक्षक केवल “गलत” कहने के बजाय गलती का कारण पहचानता है, सही कदम दिखाता है और विद्यार्थी को फिर प्रयास करने देता है। यह अभ्यास, feedback और परिणाम से सीखने की प्रक्रिया को सहारा देता है।
स्थिति 2: नई प्रक्रिया सीखनी है
शिक्षक पहले पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन करता है, फिर चरणों को स्पष्ट करता है और विद्यार्थी को स्वयं करने का अवसर देता है। यह Bandura के modeling और अभ्यास दोनों से जुड़ता है।
स्थिति 3: अवधारणा याद है, समझ नहीं
यदि विद्यार्थी क्षेत्रफल का सूत्र दोहरा सकता है लेकिन सवाल हल नहीं कर पाता, तो चित्र, वस्तु या परिचित उदाहरण के माध्यम से भागों का संबंध स्पष्ट किया जा सकता है। यह अर्थपूर्ण समझ और insight को प्रोत्साहित करता है।
कक्षा में किसी एक सिद्धांत को हर समस्या का समाधान नहीं मानना चाहिए। शिक्षक को विद्यार्थी की पूर्व-समझ, भाषा, रुचि, उपलब्ध सामग्री, सामाजिक परिस्थिति और सीखने के प्रमाणों को ध्यान में रखना चाहिए। NCERT की शिक्षण-संबंधी सलाह भी सक्रिय भागीदारी, चर्चा, खोज और पूर्वज्ञान से संबंध बनाने पर बल देती है।[2]
बाल विकास और अधिगम के अन्य पहलुओं के लिए Intelligence and Personality CTET Notes 2026 भी संबंधित अध्ययन सामग्री है। गणित के शिक्षण-संदर्भ में Fractions and Decimals और Profit, Loss, Discount & Interest के उदाहरण उपयोगी हो सकते हैं।
7. CTET संदर्भ और अभ्यास प्रश्न
CTET की आधिकारिक वेबसाइट पर पुराने प्रश्न-पत्र और सूचना-बुलेटिन उपलब्ध हैं।[3] नीचे दिए गए प्रश्न अभ्यास प्रश्न (Practice Questions) हैं, आधिकारिक प्रश्न-पत्रों से सत्यापित PYQ नहीं। इसलिए इनके साथ कोई अप्रमाणित वर्ष, आवृत्ति या अंक-भार नहीं जोड़ा गया है।
Practice Question 1 — अवधारणा
किसी विद्यार्थी को भोजन देखकर स्वाभाविक रूप से लार आती है। Pavlov के उदाहरण में भोजन क्या है?
उत्तर: Unconditioned Stimulus (UCS), क्योंकि यह प्रशिक्षण के बिना प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
Practice Question 2 — अनुप्रयोग
शिक्षक विद्यार्थी की मेहनत की प्रशंसा करता है और विद्यार्थी आगे भी मेहनत करने लगता है। Skinner के अनुसार यह किसका उदाहरण हो सकता है?
उत्तर: Positive reinforcement, यदि प्रशंसा के बाद उस व्यवहार की संभावना बढ़ती है।
Practice Question 3 — अंतर पहचानें
किसी विद्यार्थी का काम पूरा करने पर शोरगुल वाला अतिरिक्त अभ्यास हटा दिया जाता है और वह काम समय पर पूरा करने लगता है। यह किसका उदाहरण है?
उत्तर: Negative reinforcement, क्योंकि अप्रिय परिस्थिति हटने के बाद व्यवहार बढ़ा।
Practice Question 4 — सिद्धांत पहचानें
एक विद्यार्थी शिक्षक को प्रयोग करते देखता है, चरण याद रखता है और फिर स्वयं प्रयोग करता है। यह किस सिद्धांत से सबसे सीधे जुड़ा है?
उत्तर: Bandura का observational learning या modeling दृष्टिकोण।
Practice Question 5 — परिस्थिति
कई प्रयासों के बाद विद्यार्थी puzzle में सफल तरीका खोजता है और बाद में उसी तरीके का उपयोग करता है। यह किस विचार से मेल खाता है?
उत्तर: Thorndike के प्रयास-और-त्रुटि दृष्टिकोण से। परिणाम के आधार पर उपयोगी प्रतिक्रिया मजबूत हो सकती है।
Practice Question 6 — Assertion–Reason
कथन (A): Negative reinforcement और punishment का अर्थ एक ही है।
कारण (R): दोनों में “negative” शब्द आता है।
उत्तर: कथन और कारण दोनों गलत हैं। Negative reinforcement व्यवहार बढ़ाता है; punishment व्यवहार घटाने के लिए प्रयुक्त परिणाम है। “Negative” हटाने को दर्शाता है।
Practice Question 7 — उदाहरण से पहचानें
घंटी और भोजन को बार-बार साथ प्रस्तुत करने के बाद कुत्ता घंटी सुनकर लार छोड़ता है। घंटी अब क्या है?
उत्तर: Conditioned Stimulus (CS)।
Practice Question 8 — शिक्षण-रणनीति
विद्यार्थी एक ज्यामितीय सूत्र याद रखता है लेकिन उसका कारण नहीं समझता। शिक्षक आकृति बनाकर हिस्सों के संबंध दिखाता है। कौन-सा दृष्टिकोण विशेष रूप से प्रासंगिक है?
उत्तर: Gestalt/insight दृष्टिकोण, क्योंकि विद्यार्थी को समग्र संबंध समझने में मदद मिलती है।
Practice Question 9 — तत्परता
अनुपात पढ़ाने से पहले शिक्षक गुणा और भाग की समझ जाँचता है। Thorndike का कौन-सा नियम इस निर्णय से सबसे अधिक जुड़ता है?
उत्तर: Law of Readiness, क्योंकि नए अधिगम से पहले आवश्यक तैयारी देखी जा रही है।
Practice Question 10 — अवधारणा में अंतर
विद्यार्थी एक विशेष घंटी के बजाय उससे मिलती-जुलती ध्वनि पर भी वही सीखी हुई प्रतिक्रिया देता है। Classical conditioning में इसे क्या कहते हैं?
उत्तर: Stimulus generalization (उद्दीपन सामान्यीकरण)।
Practice Question 11 — कथन का मूल्यांकन
“जो विद्यार्थी किसी मॉडल को देखता है, वह उसके व्यवहार की नकल अवश्य करेगा।” क्या यह कथन सही है?
उत्तर: नहीं। अवलोकन से सीखना संभव है, लेकिन ध्यान, स्मृति, क्षमता, परिस्थिति और प्रेरणा इस बात को प्रभावित करते हैं कि व्यवहार किया भी जाएगा या नहीं।
Practice Question 12 — मिश्रित स्थिति
शिक्षक सही उत्तर के साथ-साथ समाधान की रणनीति पर feedback देता है, फिर विद्यार्थी को नए प्रश्न पर वही विचार लागू करने देता है। यह किस प्रकार की शिक्षण-प्रक्रिया को बढ़ावा देता है?
उत्तर: अभ्यास, प्रतिक्रिया-सुधार और नई परिस्थिति में ज्ञान के स्थानांतरण को। इसे केवल किसी एक मनोवैज्ञानिक सिद्धांत तक सीमित नहीं किया जा सकता।
CTET के आधिकारिक पुराने प्रश्न-पत्रों को पढ़ते समय प्रश्न की मूल भाषा, पेपर/सेट और उत्तर-कुंजी को साथ मिलाकर देखना चाहिए। पुराने पेपर देखने के लिए CTET Archive और Previous Year Information Bulletin उपयोग किए जा सकते हैं।
8. त्वरित पुनरावृत्ति
एक नज़र में
- Learning: अनुभव से ज्ञान, कौशल या व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी बदलाव।
- Thorndike: Trial and Error; Effect, Exercise, Readiness.
- Pavlov: Classical conditioning; उद्दीपनों के बीच सीखी गई संगति; UCS, UCR, CS, CR.
- Skinner: Operant conditioning; व्यवहार के बाद आने वाले परिणाम; reinforcement व्यवहार बढ़ाता है, punishment घटाता है।
- Bandura: Observational learning; Attention, Retention, Reproduction, Motivation.
- Gestalt / Köhler: समस्या के समग्र संबंधों को समझना और insight.
याद रखने का तरीका: “Thorndike—प्रयास, Pavlov—संगति, Skinner—परिणाम, Bandura—अवलोकन, Köhler—अंतर्दृष्टि।” यह केवल पुनरावृत्ति-सहायक संकेत है, सिद्धांतों का पूरा विवरण नहीं।
संबंधित नोट्स: अधिगम प्रक्रिया और सिद्धांत तथा Learning Process and Principles के दूसरे प्रकाशित पृष्ठ भी उपलब्ध हैं। विषय-संदर्भ के अनुसार Agriculture Occupations की सामग्री भी देखी जा सकती है।
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अधिगम हमेशा व्यवहार में दिखाई देने वाला बदलाव है?
नहीं। सीखने से ज्ञान या समझ में बदलाव हो सकता है, जो तत्काल व्यवहार में स्पष्ट न दिखे। व्यवहार का प्रदर्शन अवसर, प्रेरणा और परिस्थिति से भी प्रभावित होता है।
Negative reinforcement और punishment में क्या अंतर है?
Negative reinforcement में अप्रिय परिस्थिति हटने से व्यवहार बढ़ता है। Punishment का उद्देश्य किसी व्यवहार की संभावना घटाना होता है। दोनों को एक जैसा नहीं मानना चाहिए।
क्या Bandura के अनुसार देखकर सीखा गया हर व्यवहार दोहराया जाता है?
नहीं। अवलोकन सीखने का अवसर देता है, लेकिन व्यवहार का प्रदर्शन ध्यान, स्मृति, क्षमता, प्रेरणा और परिस्थिति पर निर्भर कर सकता है।
क्या इन सिद्धांतों से हर साल निश्चित संख्या में CTET प्रश्न आते हैं?
निश्चित संख्या या प्रतिशत का दावा करने के लिए व्यवस्थित, स्रोत-आधारित प्रश्न-पत्र विश्लेषण चाहिए। यहाँ कोई निश्चित वार्षिक संख्या नहीं दी गई है। अभ्यास के लिए आधिकारिक पुराने प्रश्न-पत्र और उत्तर-कुंजी देखना उचित है।
Paper I और Paper II में क्या इन सिद्धांतों का अलग अर्थ होता है?
सिद्धांतों के मूल अर्थ नहीं बदलते। CTET के दोनों पेपरों में आयु-समूह और शिक्षण-संदर्भ अलग हो सकते हैं; इसलिए उदाहरणों को संबंधित कक्षा और विषय के अनुरूप समझना उपयोगी है। वर्तमान परीक्षा-संबंधी विवरण के लिए CTET की आधिकारिक सूचना देखें।
संदर्भ
- NCERT, Basics in Education, जिसमें सक्रिय भागीदारी और सीखने के दृष्टिकोणों पर चर्चा है: https://www.ncert.nic.in/desm/pdf/basic_in_education.pdf.
- NCERT, Advisory for Schools: Teaching with the New Textbooks Following Appropriate Pedagogy: https://ncert.nic.in/pdf/announcement/NCERT-Advisory-for-Schools.pdf.
- Central Teacher Eligibility Test (CTET), official archive of question papers and answer keys: https://ctet.nic.in/archive/.