CTET (Central Teacher Eligibility Test) CTET Paper 1 & 2 Practice Hindi Practice MCQs (Bilingual)
About CTET (Central Teacher Eligibility Test) CTET Paper 1 & 2 Practice Hindi Practice MCQs (Bilingual)
Practice high-yield multiple-choice questions (MCQs) for CTET (Central Teacher Eligibility Test) CTET Paper 1 & 2 Practice Hindi Practice MCQs (Bilingual). All questions feature authentic Previous Year Question (PYQ) trends, bilingual support (English & Hindi), and instant step-by-step explanations.
Exam Pattern & Practice Overview
- Language Support: English & Hindi (toggle anytime)
- Format: Untimed self-paced practice with instant answer validation
- Target Focus: Authentic NCERT & State Board syllabus alignment
Sample Questions Preview
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - 'चरित्र' शब्द में 'इक' प्रत्यय लगाने से कौन-सा नया शब्द बनेगा?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - 'चरित्र' शब्द में 'इक' प्रत्यय लगाने से कौन-सा नया शब्द बनेगा?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - गद्यांश में प्रयुक्त 'प्राचीन' शब्द का सही विलोम क्या होगा?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - गद्यांश में प्रयुक्त 'प्राचीन' शब्द का सही विलोम क्या होगा?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - आज की शिक्षा प्रणाली में किसका प्रभाव सबसे अधिक बढ़ गया है?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - आज की शिक्षा प्रणाली में किसका प्रभाव सबसे अधिक बढ़ गया है?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - गद्यांश के अनुसार प्राचीन काल में विद्यार्थी कहाँ रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - गद्यांश के अनुसार प्राचीन काल में विद्यार्थी कहाँ रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - गद्यांश के अनुसार, भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान किससे ऊँचा माना गया है?
'भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा माना गया है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। गुरु केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं देते थे, बल्कि शिष्य के चरित्र का निर्माण भी करते थे। आज की शिक्षा प्रणाली में यद्यपि तकनीकी का प्रभाव बढ़ गया है, फिर भी एक आदर्श शिक्षक की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।' - गद्यांश के अनुसार, भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान किससे ऊँचा माना गया है?
Interactive Practice
Loading full practice set…